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अटल जी को लेकर शोक प्रस्ताव का विरोध करने वाले ओवैसी के पार्षद पर आया कोर्ट का फैसला, कोर्ट ने अब..

16 अगस्त की शाम को देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन हो गया था. जिसके बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गयी थी. एक तरफ देशभर के लोग अटल जी के निधन के बाद शोक व्यक्त कर रहे थे. पीएम मोदी समेत देशभर के तमाम नेता अटल जी के निधन के बाद दिल्ली उनके अंतिम दर्शन करने और श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे थे. वहीँ दूसरी तरफ औरंगाबाद नगर निगम की बैठक में ओवैसी की पार्टी के पार्षद ने अटल जी को श्रद्धांजलि देने का विरोध जताया था. जिसके बाद बीजेपी के पार्षदों ने ओवैसी के पार्षद सैयद मतीन राशिद की नगर निगम में ही जमकर पिटाई कर दी थी.

अटल जी के निधन के बाद शोक व्यक्त करने पर उठाई थी आपत्ति 

अटल जी के निधन के बाद नगर निगम की बैठक हुई, जिसमें तय किया गया था कि अगले दिन भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के निधन के चलते शोक सभा और श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी. वहीँ बैठक में शामिल एआईएमआईएम के पार्षद सैयद मतीन राशिद ने इस बात का विरोध किया. जिसके बाद बीजेपी पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा और उसकी जमकर चप्पलों से नगर निगम में ही धुनाई कर डाली थी.

पार्षद सैयद मतीन राशिद की गिरफ्तारी के बाद आया कोर्ट का फैसला 

सदन में पिटाई के बाद पुलिस ने राशिद को महाराष्ट्र प्रिवेंशन ऑफ डेंजरस एक्टिविटीज ऑफ स्लमलॉड्र्स, ड्रग ओफेंडर्स, बुटलेगर्स और डेंजरस पर्सन एक्ट 1981 के तहत मामला दर्ज कर लिया था. गिरफ्तार होने के बाद राशिद ने बीजेपी पार्षदों की गिरफ्तारी की मांग उठाई थी. लेकिन राशिद पर आरोप लगा था कि वह पिटाई के मामले को दो समुदाय के लोगों के बीच तनाव का माहौल पैदा करने का काम कर रहे थे. हालाँकि राशिद को इस मामले में जमानत मिल गयी थी मगर कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर किये गये मुकदमों के चलते एक साल की सजा सुना दी. कोर्ट के फैसले के बाद ओवैसी के भी होश उड़ गये.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र पुलिस ने राशिद के ऊपर चल रहे अन्य मामलों को लेकर कोर्ट के सामने उसे एक साल जेल की मांग रखी थी. जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया और राशिद को 1 साल की सजा सुना दी. सैयद पर दो समुदाय के बीच शांति भंग करने का आरोप लगा था. कोर्ट के फैसले के बाद सिटी चौक पुलिस स्टेशन की एक टीम हरसुल जेल पहुंच गयी, जहाँ राशिद को पुलिस कस्टडी में रखा गया था. पुलिस ने वहां पहुंचने के बाद राशिद को एक साल के लिए सेन्ट्रल जेल भेज दिया. औरंगाबाद कमिश्नर चिरंजीव प्रसाद ने बताया कि राशिद पर यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले वह तब विवादों में आये थे जब उन्होंने नगर निगम में राष्ट्रगान बजाने का विरोध किया था.

News Source-ZeeNews

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