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सावन खत्म होने से पहले ही नंदी के कान में जरूर बोले ये शब्द, जल्द पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

भारत में हर महीने कोई ना कोई त्योहार मनाया जाता है. वैसे तो साल में 12 महीने होते हैं लेकिन इन सब महीनों में जो सबसे पवित्र महीना माना जाता है वह है सावन का महीना. सावन भगवान भोलेनाथ के सबसे प्रिय महीनों में से एक माना जाता है जिस वजह से ही लोग इस महीने में भगवान शिव का व्रत पूजन करते हैं.  इस महीने में भगवान शिव का रुद्राभिषेक से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.

सभी लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए  उनके रुद्राभिषेक के दौरान बेल पत्र, दूध, शहद, पुष्प, भाग , धतूरा, कुशा आदि अर्पित किया जाता है.लेकिन से आते वक्त सबसे जरूरी काम को करना भूल जाते हैं.

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दरअसल जब भी आप मंदिर में जाते हैं तो आपने देखा होगा कि भगवान शिव की मूर्ति के पास नंदी बैठे हुए होते हैे. उस दौरान आप भगावान शिव की पूजा व उनका रुद्राभिषेक करके बाहर निकल जाते है. लेकिन क्या कभी सोचा है कि हेमशा भगवान शिव के पास नंदी क्यों बैठे रहते हैं, आप आप कहेंगे कि ये नंदी भोलनाथ के वाहन है इसीलिए हमेशा वहां विराजमान रहते हैं, लेकिन असल में नंदी विराजने का कारण आप नहीं जानते होंगे,

मान्यता अनुसार भगवान शिव के पास बैठे नंदी के कान में अपनी मनोकामना बोलने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है. यदि आपको यकीन नहीं तो आप इसके पीछे की कहानी भी जान सकते हैं.

 

जिसके बाद  उन्होंने इंद्र देव का तप किया

जिसके बाद भगवान शिव नें दिया ये वरदान

जब भोलेनाथ के वाहन को ये बात पता चली तो उन्होंने मृत्यु को जीतने के लिए भगवान शिव का तप किया. भगवान शिव नंद की भक्ति से खुश होने के  बाद उनको अजर अमर होने का वरदान दिया, जिसके बाद नंदी नंदीश्वर हो गए, और इसके बाद ही इनका विवाह मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ विवाह हुआ, भगवान शिव ने नंदी से प्रसन्न होकर कहा कि वत्स मेरा जहां स्थान होगा वहीं आपका निवास स्थान होगा. आपकी पूजा के बिना मेरी पूजा अधूरी हैं, इस कारण से हर मंदिर में भगवान सिव के साथ नंदी को स्थपित किया जाता है और जो भी कोई भक्त मंदिर में पूजा पाठ करने के बाद नंदी के कानों में अपनी मनोकामना कहता है वह जल्द ही पूरी हो जाती है.

 

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